हम लफ़्ज़ ढूँढते रहे

हम लफ़्ज़ ढूँढते रहे तुम्हारी ख़ामोशियों मे भी फँसाने ना जाने कितने छुपे थे हमारी इन ऑंखों मे भी …. नाराज़गी हमे न थी न है तुम्हारी रूसवाइयों से कभी हम आशियॉं ही बना न सके तुम्हारे इस दिल मे कभी … कुछ अलग सा ही…

Read More →

कुछ इस तरह

कुछ इस तरह से रख लिया है मैंने हर इक लम्हा समेट कर मानो सदियों से साथ था कभी जुदा हुआ ही नही …. क़दमों मे लाकर के रख दो कायनात की सारी ख़ुशियाँ ना जाने क्यूँ उन पर ये दिल मेरा कभी फ़िदा हुआ ही…

Read More →

बड़ी दूर तक जहाँ तक मेरी ये नज़र जायें…..

बड़ी दूर तक जहाँ तक मेरी ये नज़र जायें फैला है नीला ये पानी पड़ती है सुनहरी जहाँ किरणें हो जाता है चमकीला वहाँ पानी… शाम को लगता है सिंदूरी लाल सा दिन मे है कुछ हरा हरा सा सुबह लेती है जैसे ही अँगड़ाई हो…

Read More →

शाख़ से टूटकर गुल नही खिलते …..

शाख़ से टूटकर गुल नही खिलते राह मे पीछे छूट जाते हैं जो मंज़र वो जिंदगी मे फिर नही मिलते बुझा दें नफ़रत से जो मुहब्बत के चराग वो जलाये से फिर नही जलते साथ हो लेता है ज़माना ख़ुशगवारी मे ग़म की धूप मे कोई…

Read More →

रिमझिम बरसो सावन बनके ……

रिमझिम बरसो सावन बनके मनमीत मेरे मनभावन बनके …. अब प्यार की बदरी कम ना हो प्यासी ऑंखें अब नम ना हो तेरी प्रेम सुधा इतनी बरसा जलती भूमि अब हम ना हो … तपती सॉंसे महका जाओ शीतल झोंका बन आ जाओ मेरी रूह मे…

Read More →

To read more go to Poems or Shayari