जब आसमां….

जब आसमां खुद ही उतर कर आ गया ज़मी पर
किसको पडी है चांद और सितारों को कोई ठूंठे
सब कुछ सिमट कर आ गया इक शकसियत मे तेरी
किसको पडी हैं जन्नत के नज़ारो को कोई ठूंठे ।
रूह को महका रही है खुशबु तेरी यादों की
किसको पडी है झूमती बहारो को कोई ठूंठे ।


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