तबस्सुम पे नम ओस की बूँदे ….

तबस्सुम पे नम ओस की बूँदे ,
रात ज्यों शबनम में नहा कर आई है।
फलक पे बिखरे हैं ना जाने कितने मोती,
दिल की कली आज नये अंदाज़ में मुस्कुराई है ।


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