तेरी इक नज़र पे वार दूँ

तेरी इक नज़र पे वार दूँ
कायनात मैं सारे जहाँन की।
मंदिर है दिल मेरा दिल नही
महज़ बात हैं पहजान की ।
जुर्रत तो ज़र्रे वफ़ा की देखिये
इसे ख्वाईश है आसमान की।
आफ़ताब कहे,माहताब कहे
तौफीक है क़द्र दान की।


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