रिश्तों की दहलीज़ पर ….

रिश्तों की दहलीज़ पर
बैठे रहे हम उम्र भर,
खिड़की खुलेगी बस अभी
आयेगा हम तक कोई कभी,
ऐसा मगर कभी हुआ नही
सूनी रही दिल की ज़मीं ,
सूना रहा मेरा आॉंस्मां
कोई चॉंद बन कर छाया ही नही
उसे प्यार मुझ पर आया ही नही…….२


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