हसरतें…….

हसरतें इतनी है कि उनका बोझ
हमसे उठाया न गया …

तुम तो छोड़ कर चल दिये ज़ालिम
पर तुम्हें छोड़ कर हमसे ही जाया न गया…

तरसता रहा ये दिल मेरा,दिल की आवाज़ सुनने को
पर एक बार भी तुम से मुझे बुलाया न गया ….

है प्यार बेइन्तिहा हमे, मालूम है तुमको
चाहते तो थे छुपाना पर हमसे ये छुपाया न गया ….

शामिल थे ,शामिल रहे ज़िंदगी मे मेरी तुम ,पर
दिल की दहलीज़ तक कभी भी तुमसे आया न गया…

तुम भूल गये क़समें ,तुम भूल गये वादे
पर हमसे तो अब तक वो सब भुलाया न गया …

मुश्किल है मेरा जीना,एक पल भी तेरे बिन
तुमको मगर ये राज़ हमसे बताया न गया …

ऑंखों ने बयां कर दी ,बातें सब इस दिल की
होंठों से तो हमसे ये कभी ,जताया न गया ….

तुम तो छोड़ कर चल दिये ज़ालिम
पर तुम्हें छोड़ कर हमसे ही जाया न गया…


Leave a Reply