Category: Poem

पलकों ने क़ैद कर लिये…..

पलकों ने क़ैद कर लिये ना जाने कितने आॉंसू तूफ़ाँ ज़रूर उठाते वरना हमारें आॉंसू … कुछ को दामन की मंज़िल मिली कुछ रूखसारों पर बह गये कुछ आॉंखों में ही बिखर गये थे जो बदकिस्मत बेचारे आॉंसू …. कुछ ग़म की दॉस्तान है कुछ ख़ुशी…

Read More →

फ़ासला तो है…

फ़ासला तो है ,ख़्यालों का ही सही, दूरियाँ तो हैं हमारे दरमियाँ । एक सुलगता शेर मेरा पढ लीजिये , आग हो जायेगी तुम्हारी ख़ामोशियॉं । पल दो पल ही सही, गुज़ारो संग मेरे, और तनहा हो जायेंगी तुम्हारी तन्हाइयॉं ।

Read More →

तमन्ना है….

तमन्ना है कि फूलों के अधखुले होंठों से वो पाक हँसी चुरा कर हम अपने होंठों पे सजा लें या फिर ए खुदा अपनी मेहरबानी से फूलों के मुस्कुराने का वह मासूम अंदाज़ हमे भी बख़्श दे …..

Read More →

जिस ज़माने मे….

जिस ज़माने मे दिले अरमॉं ना हो सके ज़ाहिर उस ज़माने से मुहब्बत करके भला क्या पा लोगे । इस तलाश मे कि थोड़ी सी ख़ुशी हो जाये हासिल मशरूफ ज़िन्दगी की तंग राहों मे नादां ,ख़ुद को भी खो दोगे …..

Read More →

सज़दे मे जिनके….

सज़दे मे जिनके झुक जाती है ये नज़रें ख़ुद ब ख़ुद खुदा जाने वो लोग कैसे कमाल लोग होतें है… औंरों की ख़ुशियों में जो सदा ढूँढ लेते हैं अपनी ख़ुशी यारों …यक़ींनन वे ही लोग बेमिसाल लोग होतें है …..

Read More →

हां मैंने देखा है …..

हां मैंने देखा है .. हर ख़्वाब को टूटकर चूर चूर होते मैंने देखा है ….. हाँ मैंने देखा है.. ख़ुद को ख़ुद से दूर होते मैंने देखा है….. हाँ मैंने देखा है.. ना चाह कर भी जीने को मजबूर होते मैंने देखा है ….. हाँ…

Read More →

खोया खोया सा हर इन्सा है…..

खोया खोया सा हर इन्सा है हर रूह है भटकी भटकी जीवन संग्राम स्थली है जहाँ हर जान है शूली पर अटकी । हर ओर भुखमरी सी छाई है हर ओर एक नई त्रिष्णा है है प्यास बहुत प्यासी प्यासी प्यासा प्यासा सा हर इन्सा है…

Read More →

गुज़ारिश है मेरी ये रब से…..

गुज़ारिश है मेरी ये रब से… कण कण मे फूल खिला दे हर रोते को तू हँसा दे इस नफ़रत को तू मिटा दे हर दिल मे प्यार जगा दे…..२ गुज़ारिश है मेरी ये सब से …. जो कुछ भी दिया है उस रब ने आओ…

Read More →

बड़ी बेरंग सी गुज़र रही है …..

बड़ी बेरंग सी गुज़र रही है आजकल जिंदगी यारों आओ फिर से मिलकर इसमें कुछ चमकीले रंग भर दें.. कुछ रंगों मे होगी अपनो की सोंधी खुशबु कुछ दोस्तों के प्यार मे भीगे होंगें कुछ मे होगी यादों की मीठी सी महक कुछ उम्मीदों की सुनहरी…

Read More →

लफ़्ज़ों मे उलझी उलझी …..

लफ़्ज़ों मे उलझी उलझी कुछ बहकी सी,कुछ खोई सी अपनी ही एक दुनिया मे आबाद हूँ मै…. क्या कहते हैं क्या सोचते हैं सब फ़र्क़ नही पड़ता मशरूफ सी हूँ खुद को ढूँढने मे मैं खुद ही खुद के साथ हूँ मैं….. सबकी अपनी इक दुनिया…

Read More →